Operating System in hindi | ऑपरेटिंग सिस्टम का परिचय

दोस्तों इस टूटोरियल में आपको यह बताया गया है की ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating system in hindi) क्या होता है कैसे कार्य करता है और साथ ही ये कितने प्रकार के होते है | क्योकि बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कोई भी कंप्यूटर हो या कोई फ़ोन किसी भी काम के नहीं है में उदाहरण के लिए आपको कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम बताता हु जैसे – विंडोज (Windows), एंड्राइड (Android), लिनक्स (Linux).

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम  को एक सिस्टम सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है जो यूजर (User) तथा कम्प्यूटर (Computer) के मध्य सेतु (Bridge) का कार्य करता है अर्थात यह इन दोनों के मध्य एक इंटरफ़ेस तैयार करता है | ऑपेरेस्टिग सिस्टम सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स का सेट होता है | जो कंप्यूटर को पूरी तरह नियंत्रित करता है | रोम (Read only memory) द्वारा बूटिंग के उपरांत का संचालक ऑपरेटिंग सिस्टम करता है आप जब कंप्यूटर को ऑन (On) करते हो वह से लेके उस पर कार्य (work) करने तथा बंद (off) करने तक की जो भी फ़ंक्शनैलिटी (Functionality) होती है वह सब ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा ही सम्भव हो पता है | यदि किसी कंप्यूटर या मोबाइल में ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं होता है तो वह केवल एक हार्डवेयर है | इसको सरल शब्दों में OS कहा जाता है | OS की विशेषता यह है की यह सारे इनपुट डिवाइस तथा आउटपुट डिवाइस को कण्ट्रोल करके रखता है अर्थात उसे सुचारु रूप से उपयोग में लाने का कार्य करता है |

Operating System

 

ऑपरेटिंग सिस्टम के फंक्शन एवं कार्य

जैसे की आपको पता चल ही गया कि ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर तथा कम्प्यूटर के मध्य इंटरफ़ेस करने का कार्य करता है और इसे सिस्टम सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है | कंप्यूटर जब भी ऑन होता है तो रोम में इसकी कुछ मुख्य फाइले लोड हो जाती है जो सिस्टम को चलाने के लिए आवश्यक होती है | निचे OS के कुछ महत्वपूर्ण फंक्शन के बारे में बताया गया है इनको मुख्य्तः पाँच भागो में बाटा गया है |

  • मैमोरी मैनेजमेंट फंक्शन
  • प्रोसेसर मैनेजमेंट फंक्शन
  • डिवाइस मैनेजमेंट फंक्शन
  • फाइल मैनेजमेंट फंक्शन
  • सिक्योरिटी मैनेजमेंट फंक्शन

मैमोरी मैनेजमेंट फंक्शन

Memory Management Function मैमोरी को कन्ट्रोल करने का कार्य करता है | यह प्राइमरी तथा सेकण्डरी मैमोरी को व्यवस्थित रखने का कार्य करता है साथ ही यह देखता है की कंप्यूटर में मैमोरी कहा खाली है कहा पर डाटा है तथा नया डाटा कहा स्टोर करना है पूरा कंट्रोल रखने का कार्य करता है | मल्टीप्रोग्रामिंग तथा मल्टीप्रोसेसिंग इसी फंक्शन द्वारा किये जाते है |

 

प्रोसेसर मैनेजमेंट फंक्शन

प्रोसेसर एक चिप होती है जो कंप्यूटर के अंदर हो रही सारी गतिविधियों को कंट्रोल करके रखता है | इसे कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है | प्रोसेसर यूजर द्वारा दिए गए निर्देशों को कंप्यूटर तक पहुँचाता है जिससे यूजर द्वारा दिए गए टास्क को पूरा किया जाता है | प्रोसेसर को गीगाहर्टज में मापा जाता है | कुछ महत्वपूर्ण प्रोसेसर जैसे – Intel, AMD, Samsung, IBM आदि है जिसमे सबसे अधिक प्रयोग होने वाला प्रोसेसर Intel का है जिसका Core प्रोसेसर सबसे अधिक अच्छा है | Core प्रोसेसर जितना ज्यादा बढ़िया होगा कंप्यूटर उतना अच्छा काम करेगा और स्पीड भी अधिक देगा तथा जितना कम कोर प्रोसेसर होगा वो उतना हैंग तथा उसकी रफ़्तार उतनी कम होगी |

 

डिवाइस मैनेजमेंट फंक्शन

डिवाइस मैनेजमेंट फंक्शन का कार्य डिवाइस से जुड़े सभी इनपुट तथा आउटपुट डिवाइसेस के संचालन का कार्य करता है | यह देखता है की कौन सा डिवाइस रन (run) हो रहा है तथा वह इस कार्य के लिए कितने समय का प्रयोग कर रहा है पूरी जानकारी इसी के पास रहती है |

 

फाइल मैनेजमेंट फंक्शन

इसका कार्य सभी फाइल्स को एक व्यवस्थित कर्म में रखने के लिए तथा उन सभी का रिकॉर्ड रखने का होता है जिससे हमको जब भी जिस फाइल की आवश्यकता होगी हम उसे आसानी से प्राप्त कर सकते है |

 

सिक्योरिटी मैनेजमेंट फंक्शन

सिक्योरिटी मैनेजमेंट फंक्शन का कार्य कंप्यूटर को सिक्योरिटी प्रदान करना होता है | यह डाटा को चोरी होने से बचाता है जिसके लिए इसमें फ़ायरवॉल का प्रयोग किया जाता है ताकि कोई भी unauthorized यूजर इसे नुकसान ना पहुँचा सके और इसे एक सुरक्षा प्रदान हो |

 

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (Types of Operating System)

हमने आपको ऊपर बताया की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है कैसे काम करता है पर ऑपरेटिंग सिस्टम बस एक नाम है इसे भी अनेक भागो में बाटा गया है | कंप्यूटर की पीढ़ीयो के साथ ही ऑपरेटिंग सिस्टम को भी निरंतर तैयार किया जा रहा है | यदि हम ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य प्रकारो के बारे में बात करे तो इसे सामान्यतः 6 (छः) भागो में बाटा गया है तो आइये जानते है उन सभी प्रकारो के बारे में जो इस प्रकार है –

  • बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम
  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम
  • मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम
  • मल्टीप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम
  • रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम
  • डिस्ट्रीब्यूटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

इस ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल पहले किया जाता था यह के नियम पर कार्य करता था अर्थात जब तक पहली जॉब (कार्य) को पूरा नहीं किया जाता था तब तक दूसरी जॉब शुरू नही हो पाती है अर्थात यह एक समय में एक ही जॉब पर कार्य करता है | इसका इस्तेमाल अब बहुत कम किया जाने लग गया है |

 

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

टाइम शेयरिंग अथवा मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में एक सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट टाइम को विभिन्न यूजर्स के लिए बाँट दिया जाता है प्रत्येक यूजर को अपना टाइम स्लॉट करना होता है | इसके रेस्पोन्स देने की रफ्तार अधिक तेज है | पहला प्रोसेसर खत्म होने के बाद ही यह टाइम स्लॉट अन्य बचे हुए प्रोसेसर को दे दिया जाता है | यदि टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की बात करे तो यह उतना सुरक्षित नहीं है |

 

मल्टीप्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

मल्टीप्रोग्रामिंग OS में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का सबसे अधिक उपयोग होता है | मुलती प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की परफॉरमेंस सबसे अधिक अच्छी होती है जिसके कारण यह एक ही समय में एक से अधिक कार्य (जॉब ) को कर सकता है | यह रेसपोन्स टाइम को कम कर देता है जिससे इसकी रफ्तार अधिक तेज होती है |

 

मल्टीप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

मल्टीप्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में 2 सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का इस्तेमाल किया जाता है | यह कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन को सुधारता है | परन्तु इसमें ज्यादा मेन मैमोरी की आवश्यकता होती है |

 

रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम

रियल टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रोसेसिंग ऑनलाइन होती है | इसमें सभी कार्य बहुत कम समय अथवा दीए गए समय सीमा में होता है जिसे रिस्पॉन्स टाइम कहा जाता है | इसमें प्रोसेसर को तेजी से प्रतिक्रिया टाइम दिया जाता है | इसका उपयोग फ्लाईट कन्ट्रोल, वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यो, रोबोट तथा रॉकेट लांचिंग में किया जाता है | यह दो प्रकार के होते है –

  • हार्ड रियल टाइम सिस्टम
  • सॉफ्ट रियल टाइम सिस्टम

डिस्ट्रीब्यूटिंग ऑपरेटिंग सिस्टम

यह एक ही समय में बहुत सारे प्रोसेसर को चलने की अनुमति प्रदान करता है जो विभिन्न एप्‍लीकेशनो को एक साथ रन करता है | यह यूजर को एक अच्छी सर्विस प्रदान करता है | यदि बात करे इसकी सिक्योरिटी की तो यह सिक्योरिटी में भी एक विश्वसनीय ऑपरेटिंग सिस्टम है | इसमें यदि किसी एक सिस्टम में खराबी आ भी जाती है तो और सुचारु रूप से कार्य करते है |

महत्वपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम

  • Windows Operating system
  • Android Operating system
  • Linux Operating system
  • Apple IOS Operating system
  • MAC Operating system

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